सोमवार, 23 अप्रैल 2018

धरा रुपी मां को बचाने के लिए लाल को आगे आना ही होगा- लाल बिहारी लाल

विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष (22 अप्रैल)
लाल बिहारी लाल

देश दुनिया में पर्यावरण का तेजी से क्षति होते देख अमेरिकी सीनेटर जेराल्ट नेल्सन ने 7 सितंबर 1969 को घोषणा की कि 1970 के बसंत में पर्यावरण पर राष्ट्रब्यापी जन साधारण प्रदर्शन किया जायेगा। उनकी मुहिम रंग लायी और इसमें 20 लाख से अधिक लोगो ने भाग लिया। और उनके समर्थन में जानेमाने फिल्म और टी.वी. के अभिनेता एड्डी अल्बर्ट ने पृथ्वी दिवस के निर्माण में एक अहम भूमिका अदा किया। यही कारण है कि उनके जन्म दिन 22 अप्रैल के अवसर पर 1970 के बाद हर साल पृथ्वी दिवस मनाया जाने लगा। एल्वर्ट को टी.वी.शो ग्रीन एकर्स में भूमिका के लिए भी जाना जाता है। 141 देशों के पहल पर 1990 में 22 अप्रैल को पूरी दुनिया में विश्व स्तर पर पर्यवरण के मुद्दो को उढाया गया जिसमें पुनः चक्रीकरण के प्रयास को उत्साहित किया गया। औऱ 1992 में रियो दी जेनेरियो में संयुक्त राष्ट्र संघने इसे करवाया। इस सम्मेलन मे ग्लोबल वार्मिग एंव स्वच्छ उर्जा को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया। सन 2000 में इंटरनेट ने पूरी दुनिया के कार्यकर्ताओं को एक मंच पर जोड़ने में मदद की जिससे यह मुद्दा ग्लोबल हो गया। वर्ष 2000 में 22 अप्रेल को 500 समुह 192 देशों के करोड़ो लोगो ने हिस्सा लिया। इसके आगे हर साल यह प्रक्रिया चलती रही। सन 2007 में पृथ्वी दिवस का अब तक के सबसे बड़ा आयोजन हुआ जिसमें अनुमानतः हजारों स्थान पर जैसे- कीव,युक्रेनकानवासबेनजुएला,तुवालु,मनिला,फिलीपिंसटोगोमैड्रीड ,स्पेनलन्दनऔऱ न्यूयार्क के करोड़ो लोगों ने हिस्सा लिया।विकास के इस अंधी दौड़ में पेड़ो की अंधाधुन कटाई,वातावरण में कार्बन मोनो अक्साइडकार्बन डाईआक्साइडसल्फर ,सीसा,पारा आदि के साथ -साथ कल-कारखानों के द्वारा धुआ एवं कचराकृषी में कीटनाशकों का अधिकाधिक प्रयोग आदी से धरती की बाह्य एवं आन्तरिक दशा काफी दयनीय हो रही है।पृथ्वी की इस दशा को सुधारने के लिए दुनिया के तमाम देश चिंतित है। उनमें भारत भी एक है। गांधी जी ने भी पर्यावरण पर चिंता ब्यक्त करते हुए पृथ्वी मां की रक्षा के लिए सकारात्म कदम उठाने की वकालत की थी। इसके लिए काफी प्रयास भी हुए । प्रौद्योगिकी मंत्रालय से पर्यावरण एवं कृषी मंत्रालय से वन विभाग काटकर तत्कालिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में 1986 में एक अगल मंत्रालय पर्यावरण एव वन मंत्रालय का गठन किया गया। इसके बाद जल संरक्षण,भूमि संरक्षण और एंव वायु संरक्षण,वन संरक्षण आदि के लिए काफी नियम बनाये गए ।फिर भी पृथ्वी से अवैध खनन जारी है।इसके रोकने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाना होगा तभी इस माँ रुपी पृथ्वी को बचाया जा सकता है। वरना पृथ्वी के नष्ट होनो से समस्त जीव जन्तु नष्ट हो जायेगे। इसके लिए जरुरी है कि जीवों के इस संकट को समझना ही होगा और पृथ्वी के प्रति अपना दायित्व निभाना होगा तभी पृथ्वी बच पायेगी और जीवों का कल्याण हो पायेगा।
लेखक- युवा पर्यावरण प्रेमी है

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

कावना कलम से भाग लिखल बिधाता- लाल बिहारी लाल


(बेटी के उपर बढ़ रहे कुकृत पर आधारित )
भोजपुरी गीत– बेटी के भाग......
*लाल बिहारी लाल


कावना कलम से भाग लिखल बिधाता
बेटी के दुख दिने दिन बढ़ल जाता
या बेटी के दिने दिन इज्जत लूटाता

माई के दारजा मिलल रहे ई समाज में
काहे घून लागल जाता देखी ई रिवाज में
जगे-जगे बेटी के )2 इज्जत लुटाता
बेटी के दुख दिने दिन बढ़ल जाता

माई बहिन बेटी होला सब समाज के
बेटिये से वंस बढ़ी सकल समाज के
मुंशी ,दरोगा सुन)2 सुन ए विधाता
बेटी के दुख दिने दिन बढ़ल जाता

तनिका ध्यान दीही भाई संस्कार पर
बढ़िया समाज बनी अच्छा बिचार पर
काहे दिने दिन)2 कुकरम बढ़ल जाता
बेटी के दुख दिने दिन बढ़ल जाता

पाण.,सी.एम सुन अभ आगे आव
बेटी के टांका रोज टुटे से बचाव
लाल बिहारी देख) 2 हाल शरमाता
बेटी के दुख दिने दिन बढ़ल जाता


-लाल बिहारी लाल, नई दिल्ली
फोन-7042663073,



सोमवार, 16 अप्रैल 2018

साहित्यकार महातम मिश्र के सम्मान में काव्य संध्या

साहित्यकार महातम मिश्र के सम्मान में काव्य संध्या

लाल बिहारी लाल

नई दिल्ली ,युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा साहित्यकार श्री महातम मिश्र जी (वैज्ञानिक ,भारत सरकार)के सम्मान में एक शानदार काव्य संध्या का आयोजन रविवार दोपहर 2 .30 बजे से पी.के.रोड ,रेलवे अधिकारी क्लब ,नई दिल्ली-1 में आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि श्री विनोद सिंह, (विभागाध्यक्ष, मूर्ती कला विभाग, बीएचयू) रहे ,एवं अध्यक्षता श्री बी एल गौड़ ( गौड़ संस के मालिक, एवम वरिष्ठ साहित्यकार) ने की विशिष्ट अतिथि डा ओमप्रकाश प्रजापति, प्रमुख सम्पादक 'ट्रू मीडिया' रहे ! सभी अतिथियों द्वारा माँ शारदे के चित्र के समुख दीप प्रज्वलित करने के उपरांत डॉ पुष्पा जोशी जी ने अपने मधुर कंठ से माँ वीणा पाणी की वंदना की ,मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर उपाध्याय एवं महासचिव ओम प्रकाश शुक्ल, ने सभी सम्मानीय अतिथियों को अंग वस्त्र ,पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया ! सुप्रभात मंच द्वारा सुरश वर्मा एवं संजय कुमार गिरि ,जगदीश मीणा ने साहित्यकार महातम मिश्रा को द्रोणाचार्य सम्मान से सम्मानित किया ! इस सुअवसर पर ट्रू मीडिया पत्रिका की ओर से श्री महातम मिश्र एवम् सुश्री वंदना मोदी गोयल को ट्रू मीडिया गौरव सम्मान 2018 से सम्मानित किया गया।साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित '' इडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स'' एवं ''ग्लोबल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स'' से सम्मानित, राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" अप्रैल - 2018 अंक जो डॉ. जयप्रकाश मानस (काव्य की शुभ्र शिला पर एक सहज हस्ताक्षर ) के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित है का विशेषांक- विमोचन भी किया गया !महिला दिवस के अवसर पर गत वर्ष एवम् इस वर्ष के निम्न लिखित रचनाकारों को "उत्कर्ष सशक्त महिला लेखन सम्मान" 2017 एवम् 2018 से 15 अप्रैल 2018 को मंच के विशेष आयोजन "उत्कर्ष काव्य लहरी" में सम्मानित किया गया -
वर्ष 2017--- डॉ सविता सौरभ, सुश्री शोभना श्याम, सुश्री बिंदू कुलश्रेष्ठ, सुश्री अंशु विनोद गुप्ता, सुश्री रीता ठाकुर, सुश्री शारदा मादरा,सुश्री मिलन सिंह !वर्ष 2018 - डॉ पुष्पा जोशी , सुश्री सूक्ष्मलता महाजन, सुश्री प्रमिला आर्य, सुश्री नीरजा मेहता ,सुश्री प्रमिला पांडेय इस सुअवसर पर ही विशेष रूप से युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच द्वारा श्री श्वेताभ पाठक को 'पंडित' उपाधि से अलंकृत किया गया। मंच द्वारा ग़ज़लकार श्री ए एस अली खान को श्रीमद्भागवत गीता की प्रति भेंट की की गई ! कवि एवं चित्रकार संजय कुमार गिरि ने साहित्यकार विजय प्रशांत एवं कामदेव को उनका पेन्सिल स्केच भी भेंट किये इस अवसर पर दिल्ली और दिल्ली से आये लगभग 45 कवि एवं कवियत्रियों में अपना शानदार काव्य पाठ किया ! काव्य गोष्ठी का शानदार मंच सञ्चालन पंडित श्वेताभ पाठक ने अपने लाजबाब अंदाज़ में किया !


विश्व भोजपुरी सम्मेलन की गाजियाबाद इकाई का शपथ ग्रहण  समारोह और पुस्तक लोकार्पण का कार्यक्रम सम्पन्न

लाल बिहारी लाल





विश्व भोजपुरी सम्मेलन की गाजियाबाद इकाई का शपथ ग्रहण समारोह  आज आर डी मिमोरियल पब्लिक स्कूल मे आयोजित हुआ । समारोह कि शुरुवात मे उपस्थित अतिथियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा को माल्यार्पण के साथ  दीप प्रज्वलित कर आज के समारोह की विधिवत शुरुवात की । उसके बाद समारोह मे पधारे लोक गायक श्री ओझा जी ने माँ सरस्वती के सम्मान मे एक भोजपुरी लोकगीत प्रस्तुत किया  । उसके उपरांत समारोह के  अध्यक्ष कृष्णा इंजीनियरिंग कालेज के डाइरेक्टर डॉ संदीप तिवारी ने श्री अशोक श्रीवास्तव जी को अध्यक्ष और जे पी द्विवेदी को महासचिव के साथ कुल 21 लोगों को उनके दायित्व की शपथ दिलाई । शपथ ग्रहण समारोह मे मुख्य अतिथि श्री मनोज भावुक , पूर्वाञ्चल भोजपुरी महासभा के चेयरमैन श्री  केदार नाथ तिवारी , मैं भारत हूँ” की सह संपादिका श्रीमति पुष्पा सिंह बिसेन , विश्व भोजपुरी सम्मेलन  के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष श्री विनय मणि त्रिपाठी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अजीत दुबे जी  के प्रतिनिधि के रूप मे पधारे श्री अरविंद दुबे जी उपस्थित रहे । तदुपरान्त गाजियाबाद मे दूसरी बार जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के  भोजपुरी गीत संग्रह “जबरी पहुना भइल जिनगी” का लोकार्पण हुआ । गाजियाबाद की धरती जो हिन्दी साहित्य का समुन्द्र है , वहाँ पर किसी भोजपुरी किताब का रचा जाना और लोकार्पण स्वयं मे लोमहर्षक लगता है । विगत दो वर्षों मे यह दूसरी किताब का लोकार्पण है ।
      विश्व भोजपुरी सम्मेलन के इतिहास पर मुख्य अतिथि श्री मनोज भावुक ने बृहत प्रकाश डाला । मनोज भावुक जी ने विश्व भोजपुरी सम्मेलन के 1995 से लेकर अब तक के सफर पर सिल सिलेवार ढंग से प्रकाश डाला ।  इसलिए उन्होने सम्मेलन के बाहर और भीतर , देश और विदेश सभी पक्षो पर बेबाकी से अपनी बात रखी । चूंकि मनोज भावुक जी  दिल्ली इकाई और इंग्लैंड इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं और मारिशस मे हुवे वे अंतराष्ट्रीय महोत्सव  मे सिरकत भी कर चुके हैं ।
 भोजपुरी गीत संग्रह जबरी पहुना भइल जिनगी पुस्तक  के  नाम का जिक्र कराते हुवे कवि भावुक ने कहा “ यह नाम ही अपने आप मे एक पूरी कविता है और कबीर वाणी की तरह संकेत मे ही जिंदगी की जिजीविषा और मुस्किलो के रूबरू करा देती है । जिनगी पहुना है और पहुना को एक न एक दिन जाना ही है । यही जीवन का एकमात्र सत्य है ।  भोजपुरी गीत संग्रह के लोकार्पण पर उन्होने इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद द्विवेदी को शुभकामना दी और कहा कि “आज जहां हर केहू बेटा बेटी , रोजी रोजगार, कोट कचहरी मे अझुराइल बा उहवें साले भीतर दू दू गो किताब के सृजन कवि के साहित्य के प्रति अनुराग आउर लेखन के प्रति निष्ठा के दर्शावत बा” ।
      समारोह का अंतिम सत्र भोजपुरी कवि गोष्ठी के नाम रहा । वहाँ पधारे करीब दर्जन भर कवियों ने अपनी भोजपुरी गीत और  कविता के माध्यम से सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया । सुनील सिन्हा ने जहां अपनी भोजपुरी कविता “माटी के देहिया से” से जहां लोगों को सोचने पर मजबूर किया , वही फरीदाबाद से पधारे श्री तरकेश्वर राय ने अपनी कविता के माध्यम से भोजपुरी भाषा के मान्यता की अलख जगाई । अशोक श्रीवास्तव जी ने अपने गीत से खूब तालियाँ बटोरी । जे पी द्विवेदी ने अपनी व्यंग कविता  “बनल रहे भौकाल बकैती” से लोगो के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी । मुख्य अतिथि श्री मनोज भावुक ने अपने भोजपुरी गीत से लोगो को मंत्रमुग्ध कर दिया । समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ संदीप तिवारी जी अपने सम्बोधन मे पूर्वञ्चल के भाषा , संस्कृति और संस्कार पर बोलते हुए उसे बनाए रखने के लिए सभी को प्रेरित किया । वहाँ उपस्थित सभी अतिथियों ने इकाई के गठन पर बधाई और शुभकामना दी । धन्यवाद ज्ञापन श्री केदार नाथ तिवारी ने किया और मंच संचालन श्री कैप्टन  ने किया        

गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

गजल- बेटा हूं मैं भारत का...

एक ग़ज़ल

बेटा हूं मैं भारत का..


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भारत की मुहब्बत ही इस दिल का उजाला है
आंखों में मेरी बसता एक ख़्वाब निराला है

बेटा हूं मैं भारत का, इटली का नवासा हूं
रिश्तों को वफ़ाओं ने हर रूप में पाला है

राहों में सियासत की, ज़ंजीर है, कांटें हैं
सुख-दुख में सदा मुझको जनता ने संभाला है

धड़कन में बसा मेरी, इस देश की गरिमा का
मस्जिद कहीं, गिरजा कहीं, गुरुद्वारा, शिवाला है

बचपन से ले के अब तक ख़तरे में जां है, लेकिन
दुरवेशों की शफ़क़त का इस सर पे दुशाला है

नफ़रत, जलन, अदावत दिल में नहीं है मेरे
अख़लाक़ के सांचे में अल्लाह ने ढाला है

पतझड़ में, बहारों में, फ़िरदौस नज़ारों में
हर दौर में देखोगे राहुल ही ज़ियाला है

-फ़िरदौस ख़ान,नई दिल्ली

शब्दार्थ : दुरवेश- संत,  अदावत- शत्रुता, अख़लाक़- संस्कार,  फ़िरदौस- स्वर्ग, ज़ियाला- उजाला

मंगलवार, 10 अप्रैल 2018

जीवन मूल्यों को समाहित करती - पीहू पुकार - लाल बिहारी लाल


पुस्तक समीक्षा
जीवन मूल्यों को समाहित करती - पीहू पुकार - लाल बिहारी लाल

रवीन्द्र जुगरान  हिंदी काब्य जगत में एक उद्यमान प्रतिभा  हैं। इनकी 49 अतुकांत कविताओं का संग्रह –पीहू पुकार शीर्षक से अनुराधा प्रकाशन ,नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है।इस एकल संकलन में शुरुआत मंगल गान से है में – हे मां बिलख रहे है तेरे लाल में कवि ने इस प्रतिकूल वातावरण में अपने दायित्वो  का  बा-खूबी विर्वाहन किया है।वही प्रेम को परिभाषित किया है कि प्रेम जब आँखों में छलकते है तो शब्द मौन हो जाते हैं।वही आगे कहते हैं कि चंद्रमा के प्यार में चकोर पागल हो जाता है तो पीहू-पीहू की पुकार करता है। इस कविता मे कवि ने बहुत ही मार्मिक चित्रण किया है। प्रियतम एवं प्रियतमा  के शब्दों को पीहू के माध्यम से । आगे कवि कहता है जीवन दर्शन की बात –जीवन में उल्लास रखों पूरे होंगे काम,तुम आश रखो.....।मन में करो कल्पना तो उसे पूरा होने का विश्वास के साथ कठिन साधना भी जरुरी है।तुम लौट के इस तरह आना इस उजड़े चमन को बसाना। संघर्ष ही जीवन है को चरितार्थ करती कविता –यही जीवन मेरा प्रेम तोरा प्रेम सबसे है अमोल प्रेम ।ए पगली भी अपनी ब्यथा को ब्यक्त करती है।
   विरह मिलन प्यार मोहब्त  से होकर  जीवन को संघर्ष रुपी सागर में अनुभवो के गोता लगाती हुई ..अपनी परिभाषा कहती हुई लहरों की तरह आगे बढ़ती है। कुछ संवेदनाओं,परिपक्वता की और रे मन बहाने ढ़ूढ़ते हैं।प्रेम से बसा घर संसार ,इक वो जो मिला से जरने के बाद सुख की घनी छाया आ ही जाती है।लाख जतन कर लो पर जीवन की सच्चाई से मुँह मोड़ना संभव नही है।इसके लिए तुम निश्चिंत रहो की हर कोई तुम-सा नहीं होता है।
कुल मिलाकर 49 कविताओ की मणिका से बने पीहू पुकार  की माला जीवन मे काफी रोमांच भर देती है..।एक से बढ़कर एक प्रेम  प्यार एंव जीवन मूल्य की कविताओं का संग्रह है पीहू पुकार। इस साहित्यिक सागर में आप भी डूबकी लगा सकते हैं। पुस्तक की कवितायें जितना सुंदर है उतनी ही सुंदर कलेवर भी है। इसके लिए लेखक को रचनाधर्मिता के लिए तो प्रकाशक को बुक के कवर डिजाइन के लिए साधुवाद। आशा है हिंदी काब्य जगत में पीहू की पुकार जरुर पाठको तक पहुँचेगी।
काब्य कृति- पीहू - पुकार
कवियित्री- रवीन्द्र जुगरान 
प्रकाशक-अनुराधा प्रकाशन ,नई दिल्ली
मूल्य-65 रु., वर्ष -2018
समीक्षक-लाल बिहारी लाल
(कवि,लेखक एवं पत्रकाऱ)


रविवार, 1 अप्रैल 2018

सरोज भारती जो को बदरपुर डायरेक्ट्री भेंट करते-लाल बिहारी लाल





समाज सेविका सरोज भारती जो को बदरपुर डायरेक्ट्री भेंट करते हुए इसके संपादक कवि,लेखक लाल बिहारी लाल। रसियन कल्चर क्लब ,मंडी हाउस,नई दिल्ली के प्रांगण में।